समस्तीपुर | 13 जनवरी 2026
पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर मंडल में रेल संरक्षा को लेकर एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां ठेकेदारी कार्य में घोर लापरवाही के कारण बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया। समस्तीपुर जंक्शन पर प्लेटफार्म पर असुरक्षित तरीके से रखा गया हाइड्रेंट पाइप चलती ट्रेन में फंस गया, जिससे यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई। यह घटना न केवल रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि मौके पर तैनात जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार की कार्यशैली को भी उजागर करती है।
घटना 12 जनवरी 2026 की रात लगभग 10:54 बजे की है, जब ट्रेन संख्या 13032 जयनगर–हावड़ा एक्सप्रेस अपने निर्धारित ठहराव के लिए प्लेटफार्म संख्या-03 पर पहुंची। इसी दौरान प्लेटफार्म के मुजफ्फरपुर छोर पर त्वरित वाटरिंग कार्य हेतु उपयोग में लाया गया हाइड्रेंट पाइप बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के लापरवाहीपूर्वक रखा गया था। ट्रेन के आगमन के समय पाइप लुढ़ककर लोको से दसवें कोच में फंस गया और प्लेटफार्म व कोच बॉडी के बीच जाम हो गया।
स्थिति उस समय और भयावह हो गई जब ट्रेन आगे बढ़ी और हाइड्रेंट पाइप लगभग 140 मीटर तक ट्रेन के साथ घिसटता चला गया। इस दौरान प्लेटफार्म की कोपिंग टाइल्स टूट गईं, कोच के निचले हिस्से विशेषकर लैवेटरी सेक्शन को नुकसान पहुंचा तथा पीछे के एक कोच का फुटबोर्ड भी बुरी तरह मुड़ गया। यदि समय रहते ट्रेन रोकी नहीं जाती, तो यह घटना किसी बड़े रेल हादसे में तब्दील हो सकती थी।
सूचना मिलते ही स्टेशन प्रबंधन, परिचालन विभाग और तकनीकी टीम मौके पर पहुंची। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गैस कटर की सहायता से हाइड्रेंट पाइप को काटकर हटाया गया। इसके बाद प्रभावित कोच के अंडरगियर की गहन जांच की गई और आवश्यक मरम्मत कार्य कराया गया। सभी सुरक्षा मानकों की पुष्टि के बाद ट्रेन को रात 12:35 बजे आगे के सफर के लिए रवाना किया गया। एहतियातन दो एस्कॉर्ट स्टाफ भी ट्रेन के साथ लगाए गए। इस पूरे घटनाक्रम के कारण ट्रेन लगभग 90 मिनट तक प्लेटफार्म पर खड़ी रही, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह स्पष्ट हो गया कि थोड़ी सी और देर होती तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते थे। इस घटना ने रेलवे स्टेशनों पर ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे कार्यों की निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है।
मंडल प्रशासन ने इस मामले को गंभीर संरक्षा चूक और लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण मानते हुए कड़ा रुख अपनाया है। संबंधित ठेकेदार फर्म पर टेंडर शर्तों के अनुसार आर्थिक दंड लगाया गया है, वहीं परियोजना की निगरानी में लापरवाही बरतने वाले वरीय अनुभाग अभियंता (SSE) के विरुद्ध रेल सेवक अनुशासन एवं अपील नियम (D&AR) के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही घटना स्थल से सभी हाइड्रेंट और पाइप को तुरंत हटाकर रनिंग लाइन से सुरक्षित दूरी पर रखा गया है।
रेल प्रशासन ने पूरे समस्तीपुर मंडल के सभी स्टेशनों पर प्लेटफार्मों पर रखे उपकरणों की सुरक्षा समीक्षा (सेफ्टी ऑडिट) कराने का आदेश जारी किया है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।
मंडल रेल प्रबंधक श्री ज्योति प्रकाश मिश्र ने इस मामले पर सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। यह अत्यंत गंभीर घटना है और इसमें जिम्मेदार पाए गए कर्मचारियों एवं ठेकेदार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समस्तीपुर मंडल में संरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और लापरवाही करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को आश्वस्त किया है कि इस घटना से सबक लेते हुए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा तथा सुरक्षित, संरक्षित और विश्वसनीय रेल परिचालन सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।